श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में रुक्मणि विवाह सम्पन्न

कटघोरा (शिवशंकर जायसवाल ) बिजली ऑफिस छिरा भाटा में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ श्रीमती लक्ष्मी जायसवाल के निवास स्थान में 1अक्टूबर से कथा प्रवचन प्रारंभ है। आज 7अक्टूबर को रास लीला एवं रुक्मणि विवाह के बारे में वर्णन किया गया।
बृज में रास का अर्थ रस अर्थात आनंद एवं लीला का अर्थ मंचन करना है। रास लीला का अर्थ बृज में होने वाले भगवान कृष्ण गिपी एवं राधा का दिव्य प्रेम को दर्शाता है।
व्यंकटेश्वर पाण्डेय ने कथा सुनाते हुए कहा कि बृज में रास लीला करने के लिए भगवान कृष्ण ने सभी गोपियों को न्योता भिजवाया। बृज में
चुकी रास लीला था इसलिए गोपियों को न्योता भिजवाया गया परंतु शंकर भगवान ने पार्वती से कहा मै भी जाऊंगा । पार्वती बोली ये तो नहीं हो सकता।शंकर भगवान जिद पकड़ लिया और गोपियों का वेश बनाकर रास लीला में पहुंच गया और नाचने लगा नाचते नाचते उसका वेशभूषा दिखने लगा। और भगवान मनमोहन पहचान गए।

कथा वाचक पाण्डेय जी ने कथा सुनाते हुए कहा कि रुक्मिणी जी विदर्भ देश के राजा भीष्म की पुत्री थीं। उन्हें माता लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है। वह बचपन से ही श्रीकृष्ण के गुण और उनकी वीरता की कथाएं सुनकर उनसे प्रेम करने लगी थीं।
*विवाह का विरोध* रुक्मिणी के बड़े भाई ‘रुक्मी’ उनकी इच्छा के विरुद्ध उनका विवाह चेदिराज शिशुपाल से तय करना चाहते थे। शिशुपाल, श्रीकृष्ण के फूफा का लड़का था।
श्रीकृष्ण के नाम पत्र जब रुक्मिणी जी को इस जबरन विवाह का पता चला, तो उन्होंने एक ब्राह्मण के हाथों श्रीकृष्ण को गुप्त संदेश भेजा। उस पत्र में उन्होंने श्रीकृष्ण से अनुरोध किया कि वे आएं और उनका हरण करके उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करें।
*विवाह और हरण विवाह* से ठीक पहले रुक्मिणी जी मंदिर में पूजा करने गईं। जब वे बाहर आईं, तो श्रीकृष्ण अपनी योजना के अनुसार वहां पहुंचे और सबको चौंकाते हुए रुक्मिणी जी को अपने रथ पर बैठाकर द्वारिका के गए।
9अक्टूबर दिन शुक्रवार को सबेरे श्राद्ध, हवन पूजन , तुलसी विवाह का आयोजन किया जावेगा। कथा सुनने के लिए काफी दूर दर्ज से आ रहे है।





